एक रिश्ता ऐसा



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Theblogger20

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सुबह सवेरे नींद से जागु,
सामने बस में तुमको पाऊं |

देख तुम्हारी प्यारी सूरत,
मन ही मन में खुश हो जाऊं |

रंग तुम्हारा गहरा सुनहरा,
देख के तुमको मैं खोजाऊं |

मेहक तुम्हारी भीनी भीनी,
 
बिन तुम्हारे में चैन ना पाऊं |

 पास में तुम को लेकर बैठूं,
अपने आप में मैं खो जाऊं |

सालों से यह गहरा रिश्ता,
सच्चे दिल से मैं तो निभाउ |

एक चुस्की तेरी गरम-गरम,
"
मेरी चाय" तेरे नशे का यही है आलम |

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