Mehangai



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annuyadav

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Hellooo guys...

Warm welcome...

                        महंगाई

इस बढ़ती महंगाई में, मैं कुछ सस्ता देखने निकली,

बीच सड़क पर मुझे एक‌‌ धब्बो वाली लड़की मिली।

न जाने क्यों उसे देख कर मुझे घिन्न सी आई।

असमंजस में पड़ गई मैं, जब वो मेरी ओर देख कर मुस्कुराई।

मैंने उससे वार्तालाप प्रारंभ किया।

और उसने अपना दुख बताना आरंभ किया।

कुछ जलीलो ने उसकी इज्जत पर आंख उठाई।

और जब सफल ना हो पाए तो एसिड की राह अपनाई।

पैसे वाले लोग थे, तो पुलिस भी ज्यादा कुछ ना बोल पाई।

रिया चक्रवर्ती के केस वालों ने पैसे ज्यादा दे रखे थे,

 तो मीडिया ने भी सहानुभूति नहीं जताई।

फिर उसने मुझे हथरस रेप केस की कहानी सुनाई।

कि कैसे एक लड़की को घर का कबाड़ समझ जला दिया।

जवाब मांगने आए लोगों को धमकियां देकर भगा दिया।

इलाज के अभाव में लोग दरवाजों पर मर जाते हैं।

न जाने कौन से ग्रह पर नेता मेडिकल कॉलेज बनवाते हैं।

पढ़ाई के लिए हम आज भी प्राइवेट स्कूल ही जाते हैं।

इलेक्शन से पहले वैकेंसी और बाद में पेपर रद्द हो जाते हैं।

नेता की खांसी और अभिनेता की फांसी को 100 बार दिखाया जाता है।

 क्या इसी तरह कभी किसी की शहादत का भी गुणगान गाया जाता है‌।

रेप पीड़िता के इलाज के लिए ऐम्स मैं बेड कम पड़ जाते हैं। 

नेताओं के लग्जरी ward reserved बताए जाते हैं।

रेलवे, एसएससी की तैयारी करता बच्चा वैकेंसी के इंतजार में बुड्ढा हो जाता है।

अत्याचार इस कदर बढ़ चुके हैं,

कि आंख में आया आंसू भी अब अंदर की ओर बह जाता है।

एक अभिनेत्री का घर टूटने पर उसे 10 बॉडीगार्ड थमा दिए।

सुरक्षा के अभाव में न जाने कितनी रेप पीड़िताओं ने प्राण गंवा दिए।

एक वकील को थप्पड़ लग गया तो सब वकील इकट्ठा हो गए।

अरे निर्भया के न्याय की लड़ाई में,

तुम किस कोने में पड़कर सो गए।

कभी-कभी मैं सोचती हूं, कि क्यों देश आगे नहीं बढ़ पाता है।

क्योंकि हमारे यहां किसी की बलिदानी को, मुआवजे से आंका जाता है।

CPEC बन जाता है पाक में,

पर हमारा मीडिया रिया चक्रवर्ती के लिए बिक जाता है।

इस देश की हर सरकार किसानों का भला ही तो चाहती है‌।

इसलिए शायद मक्का आज भी 6rs. किलो बिक जाता  है।

पर छोड़ो ये सब बातें, मेरा काम बन गया।

मुझे सबसे सस्ती चीजों का पता चल गया।

एक लड़की की इज्जत और एक शहीद की शहादत से सस्ता देश में कुछ नहीं मिलता है।

हमारा मीडिया भी अब तो पैसों में बिकता है।

बस यही जानना बाकी है कि क्यों अखबार ₹   5 में मिलता है।


मैं आशा करती हूं आप सभी को ये कविता पसंद आई।

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COMMENTS


  1. Amazing


  2. Beautiful portrayal of pressing issue of public domain...Good choice of words ..Kudos..👍👍